
आत्मा का अस्तित्व है, थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी, आत्मा का वस्तुत्व है, थ्योरी ऑफ रियलिटी और आत्मा का पूर्णत्व है, थ्योरी ऑफ एब्सल्यूटिज़म। ‘हम’ ‘थ्योरम ऑफ एब्सल्यूटिज़म’ में हैं!
परम पूज्य दादा भगवान(1) धर्माधर्म आत्मा - अधर्म को धक्का लगाना और धर्म का संग्रह करना, उससे सांसारिक फल मिलता है। (2) ज्ञानघन आत्मा - यानी कि ‘रियल और रिलेटिव’ का ज्ञान हो। (3) विज्ञानघन आत्मा - यानी कि ‘एब्सल्यूट’ (केवल)। हम ‘विज्ञानघन आत्मा’ में बैठे हुए हैं।
परम पूज्य दादा भगवानकृष्ण भगवान की फोटो के दर्शन करने से वह ‘रिलेटिव’ को पहुँचता है। ‘यहाँ’ नमस्कार करते हैं, तो वह ‘डायरेक्ट’ उनके आत्मा को ही पहुँचता है। क्योंकि वीतराग स्वीकार नहीं करते हैं न? हमेशा ही जहाँ ‘रिलेटिव’ और ‘रियल’ दोनों दर्शन किए जाएँ, वहीं पर मोक्ष है।
परम पूज्य दादा भगवान‘रिलेटिव’ में आप आपत्ति खड़ी करोगे तो वह बुद्धिवाद है। ‘हममें’ बुद्धिवाद नहीं है। ‘हम’ तो ‘रिलेटिव’ में अबुध हैं और ‘रियल’ में ‘ज्ञानी’।
परम पूज्य दादा भगवानयह ‘रिलटिव’ देखकर ही उलझन पैदा हुई, उसी का नाम संसार! यदि ‘रियल’ देखा होता तो ऐसा होता ही नहीं!
परम पूज्य दादा भगवानकोई कहे कि, ‘ज्ञानीपुरुष रियल में सुखी होते हैं लेकिन रिलेटिव में सुखी या दुःखी हो सकते हैं,’ तब मैं कहता हूँ कि, ‘नहीं, ज्ञानीपुरुष रिलेटिव को रिलेटिव जानते हैं इसलिए रिलेटिव में भी सुखी रहते हैं।’
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