
विश्वास किसे कहते हैं? भीतर में जो पूरी ‘पार्लियामेन्ट’ है उसमें कोई विरोध न करे और एकाकार हो जाए, उसे विश्वास कहते हैं।
परम पूज्य दादा भगवानजिसे अपने आप पर विश्वास है, उसे सभी चीज़ें मिल जाएँ ऐसा यह जगत् है! लेकिन विश्वास ही नहीं आता न! विश्वास टूटा कि खत्म! विश्वास में तो अनंत शक्तियाँ हैं, भले ही वह विश्वास अज्ञानता से हो!
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