
हमारे कारण सामनेवाले को परेशानी हो, ऐसा बोलना सब से बड़ा गुनाह है। किसी ने ऐसा उल्टा कहा हो तो उसे दबा देना चाहिए, वही इंसान कहलाता है!
परम पूज्य दादा भगवानपूरी रात आप किसी को परेशान नहीं करते हो, तब क्या कोई आपको परेशान करता है? रात में कोई डाँटता नहीं है न? दिन में दखलंदाज़ी करते हो, इसलिए परेशान होते हो। कुदरत का ऐसा नियंत्रण हैं कि यदि तू दखल न करे तो एक भी परेशानी न छुए। कोई अगर तुझे परेशान करता है तो वह तेरी ही दखलंदाज़ी की वजह से है!
परम पूज्य दादा भगवानसमकिती को तो कहीं पर भी परेशानी नहीं होती। जो सभी जगह ज्ञाता-द्रष्टा ही रहे, उसे परेशानी होती ही नहीं। जब तक दखलंदाज़ी है तभी तक वह समकित कहलाता ही नहीं।
परम पूज्य दादा भगवानइस दुनिया में जो कहे कि परेशानी है वही परेशानी है। किसी भी चीज़ से परेशानी नहीं होनी चाहिए।
परम पूज्य दादा भगवानसामनेवाले से हमें परेशानी हो जाए तो उसमें हर्ज नहीं है, लेकिन हमें वह देखना है कि हम से सामनेवाले को कोई परेशानी न हो। तभी सामनेवाले का प्रेम संपादित होगा!
परम पूज्य दादा भगवान‘खुद’ के प्रदेश में ‘देखना व जाननापन’ ही है। और कुछ भी नहीं है। परमात्मापन है! ‘देखने व जानने’ से आगे गए तो परेशानी है!
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