
अपने दृष्टि दोष को जो कम करे, वही धर्म है। जो दृष्टि दोष को बढ़ाए, वह अधर्म है। यह संसार दृष्टि दोष का ही परिणाम है।
परम पूज्य दादा भगवानलक्ष्मी सहज भाव से प्राप्त हो रही हो, तो होने देना। लेकिन उस पर आधार मत रखना। आधार रखकर ‘चैन’ से बैठ जाओगे लेकिन आधार कब खिसक जाएगा, यह कहा नहीं जा सकता। अत: संभलकर चलना ताकि अशाता (दु:ख परिणाम) वेदनीय में हिल न जाओ।
परम पूज्य दादा भगवानउदयकर्म स्वपरिणामी है। मतलब उदयकर्म जो भी करे वही ठीक। उसमें तू आड़ा मत होना। उदयकर्म का अर्थ ही फल देने के लिए सम्मुख हुई चीज़ें। उसमें दखल किए बगैर रह न!
परम पूज्य दादा भगवानकुछ लोग ऐसा आदेश देते हैं कि ऐसा करो, वैसा करो, श्रद्धा रखो, सत्य बोलो, धीरज रखो। ये सब तो परिणाम हैं। परिणाम कैसे बदले जा सकते हैं?
परम पूज्य दादा भगवानतू कार्य से संबंधित मत बोलना। कार्य का सेवन मत करना। वह परिणाम है। लेकिन ‘कॉज़ेज’ के कारण का सेवन कर। कारण का सेवन नहीं किया जाए, तब तक कुछ भी नहीं हो सकता।
परम पूज्य दादा भगवानजिसे अन्डरहैन्ड (रखना) पसंद नहीं है, तो अपने आप ही ऊपरी (बॉस) नहीं मिलेंगे। वह उसका परिणाम है।
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