
भगवान कहते हैं कि मन-वचन-काया और आत्मा (प्रतिष्ठित आत्मा) का उपयोग औरों के लिए कर। फिर तुझ पर कोई भी दु:ख आए तो मुझे बताना।
परम पूज्य दादा भगवानजब तक आपकी वजह से किसी को ज़रा सा भी दु:ख होता है तब तक आप पर उसका असर होगा ही। इसलिए सावधान रहना।
परम पूज्य दादा भगवानकिसी भी जीव को किंचित्मात्र भी दु:ख दोगे तो वह वेदनीय कर्म वेदना के रूप में आपको फल देगा। इसलिए किसी जीव को दु:ख देने से पहले सोचना।
परम पूज्य दादा भगवानबीवी-बच्चे तो अपने आश्रय में आए हुए हैं। जो अपने आश्रय में आया हो, उसे दु:ख कैसे दे सकते हैं? सामने वाले की गलती हो, तब भी हमें आश्रित को दु:ख नहीं देना चाहिए।
परम पूज्य दादा भगवानकिसी को दु:ख हो, ऐसा वातावरण उत्पन्न करने से हमें क्लेश उत्पन्न हो जाता है।
परम पूज्य दादा भगवानजिसे दूसरों के साथ अनुकूल होना आता है, उसे कोई दु:ख ही नहीं रहता। ‘एडजस्ट एवरीव्हेर।’
परम पूज्य दादा भगवानहिंसक भाव अर्थात् ज़रा सा भी, किंचित्मात्र भी हिंसा करना या किसी को नुकसान पहुँचाना, किसी पर गुस्सा होना, दु:ख देना, पीड़ा देना। पहले ऐसे भाव खत्म हो जाने चाहिए।
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