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क्या होता है दो प्रेमियों द्रारा आत्महत्या करने के पश्चात्?

वह प्रेम या बला?

प्रश्नकर्ता: दो लोग प्रेमी हों और घरवालों का साथ नहीं मिले तो आत्महत्या कर लेते हैं। ऐसा बहुत बार होता है तो वह प्रेम है, उसे क्या प्रेम माना जाएगा?

दादाश्री: आवारा प्रेम! उसे प्रेम ही कैसे कहा जाए? इमोशनल होते हैं और पटरी पर सो जाते हैं! और कहेंगे, ‘अगले भव में दोनों साथ में ही होंगे।’ तो वह ऐसी आशा किसी को करनी नहीं चाहिए। वे उनके कर्म के हिसाब से फिरते हैं। वे वापिस इकट्ठे ही नहीं होंगे!!

प्रश्नकर्ता: इकट्ठे होने की इच्छा हो तब भी इकट्ठे होते ही नहीं?

दादाश्री: इच्छा रखने से कहीं दिन फिरते हैं? अगला भव तो कर्मों का फल है न! यह तो इमोशनलपन है।

आप छोटे थे तब ऐसी बला लिपटी थी किसी तरह की? तब  पुरावे (प्रूफ) इकट्ठे होते हैं, सब एविडेन्स इकट्ठे होते हैं, तब फिर बला लिपट जाती है।

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