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अवज्ञाकारी बच्चों के साथ कैसा व्यव्हार करें?

एक बाप कहता है, ‘ये सारे बच्चे मेरे विरोधी हो गए हैं।’ मैंने कहा, ‘आपमें योग्यता नहीं यह स्पष्ट हो जाता है।’ आपमें योग्यता हो तो लड़के क्यों विरोध करें? इसलिए इस प्रकार अपनी आबरू मत बिगाड़ना।

और बच्चों को डाँटते रहें तो बिगड़ जाते हैं। उन्हें सुधारना हो तो हमारे पास बुलाकर कुछ बातचीत करवाएँ तो वे सुधर जाएँ!

इसलिए मैंने पुस्तक में लिखा है कि ‘अनक्वालिफाइड फादर्स एण्ड अनक्वालिफाइड मदर्स’ (बिना योग्यतावाले माता-पिता), तब बच्चे भी वैसे ही हो जाएँगे न! इसलिए मुझे कहना पड़ा, फादर बनने की योग्यता का सर्टिफिकेट लेने के बाद शादी करनी चाहिए।

इन्हें तो जीवन जीना भी नहीं आता, कुछ भी नहीं आता! यह संसार-व्यवहार किस तरह चलाना, यही नहीं आता। इसलिए फिर बच्चों की धुलाई करता है! अरे उन्हें पीटता है तो क्या वे कपड़े हैं, जो धुलाई करता है? बच्चों को इस तरह सुधारें, मारपीट करें, यह कहाँ का तरीका है? जैसे पापड़ का आटा गूँध रहे हों! मोगरी से पापड़ का आटा गूँधते हैं, इस तरह एक आदमी को धुलाई करते मैंने देखा।

माता-पिता तो वे कहलाते हैं कि अगर बेटा बुरी लाईन पर चला गया हो, फिर भी एक दिन जब माता-पिता कहें, ‘बेटा, यह हमें शोभा नहीं देता, यह तूने क्या किया?’ तो दूसरे दिन सब बंद कर दे। ऐसा प्रेम है ही कहाँ? यह तो बगैर प्रेम के माता-पिता! यह जगत् प्रेम से ही वश होता है। इन माता-पिता को बच्चों पर कितना प्यार है? गुलाब के पौधे पर माली को जितना होता है उतना! इन्हें माता-पिता कैसे कह सकते॒ हैं

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