Related Questions

इस संसार को बनानेवाला कौन है ? इस संसार को चलानेवाला कौन है ?

फैक्ट वस्तु नहीं जानने से ही यह सब उलझा हुआ है। अब आपको, 'जो जाना हुआ है' वह जानना है, या 'जो नहीं जाना हुआ है' वह जानना है?

जगत क्या है ? किस तरह बना ? बनानेवाला कौन ? हमें इस जगत से क्या लेना-देना ? हमारे साथ हमारे संबंधियों का क्या लेना-देना॒? बिज़नेस किस आधार पर ? मैं कर्ता हूँ या कोई और कर्ता है? यह सब जानने की ज़रुरत तो है ही न ?

प्रश्नकर्ता : जी हाँ।

दादाश्री : इसलिए इसमें शुरु में आपको क्या जानना है, उसकी बातचीत पहले करें। जगत किसने बनाया होगा, आपको क्या लगता है? किसने बनाया होगा ऐसा उलझन भरा जगत ? आपका क्या मत है ?

प्रश्नकर्ता : ईश्वर ने ही बनाया होगा।

दादाश्री : तो फिर सारे संसार को चिंता में क्यों रखा है? चिंता से बाहर की अवस्था ही नहीं है।

प्रश्नकर्ता : सब लोग चिंता करते ही हैं न ?

दादाश्री : हाँ, मगर उसने यह संसार बनाया तो चिंतावाला क्यों बनाया ? उसको पकड़वा दो, सीबीआई वालें को भेजकर। पर भगवान गुनहगार है ही नहीं ! यह तो लोगों ने उसे गुनहगार करार दिया है।

वास्तव में तो, गोड इज़ नोट क्रियेटर ऑफ दिस वर्ल्ड एट ऑल। ओन्ली सायन्टिफिक सरकमस्टेन्शियल एविडेन्स है। अर्थात यह तो सारी कुदरती रचना है। उसे गुजराती में मैं 'व्यवस्थित शक्ति' कहता हूँ। यह तो बहुत सूक्ष्म बात है।

प्रश्नकर्ता : यह 'सायन्टिफिक सरकमस्टेन्शियल एविडेन्स' समझ में नहीं आया।

दादाश्री : यह सब सायन्टिफिक सरकमस्टेन्शियल एविडेन्स (वैज्ञानिक सांयोगिक प्रमाणों) के आधार पर है। संसार में एक भी परमाणु चेन्ज हो सके ऐसा नहीं है। अभी आप भोजन करने बैठे, तो आपको मालूम नहीं कि मैं क्या खानेवाला हूँ ? बनानेवाला नहीं जानता कि कल खाने में क्या पकाना है ? यह कैसे हो जाता है, यही अजूबा है। आपसे कितना खाया जायेगा और कितना नहीं, वह सब परमाणु मात्र, निश्चित है।

×
Share on
Copy