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किन परिस्थितियों में कर्म बंधन नही होता?

प्रश्नकर्ता : कर्म होने कब रुकते हैं?

दादाश्री : 'मैं शुद्धात्मा हूँ' उसका अनुभव होना चाहिए। यानी तू शुद्धात्मा हो जाए, उसके बाद कर्मबंध रुकेगा। कर्म की निर्जरा होती रहेगी और कर्म होने रुक जाएँगे!

कर्म नहीं बँधें, उसका रास्ता क्या है? स्वभाव-भाव में आ जाना, वह। 'ज्ञानी पुरुष' खुद के स्वरूप का भान करवाते हैं, फिर कर्म नहीं बँधते। फिर नये कर्म चार्ज नहीं होते। पुराने कर्म डिस्चार्ज होते रहते हैं और सभी कर्म पूरे हो जाए, तब अंत में मोक्ष हो जाता है!

यह कर्म की बात आपको समझ में आई इसमें! यदि कर्त्ता बने तो कर्म बँधते हैं। अब कर्त्तापन छूट जाए, तब फिर कर्म नहीं बाँधेगा। यानी आप आज कर्म बाँध रहे हो, पर जब मैं आपका कर्त्तापन छुड़वा दूँगा, तब आपको कर्म नहीं बँधेंगे और जो पुराने हैं वे भुगत लेना। यानी पुराना हिसाब चुक जाएगा और कॉज़ खड़े नहीं होंगे। सिर्फ 'इफेक्ट' ही रहेंगी और फिर इफेक्ट भी पूरी भोग ली गईं कि संपूर्ण मोक्ष हो गया!!

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