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विवाहित जीवन में होनेवाले क्लेशों को मिटाने के लिए जादुई रबड़।

प्रश्नकर्ता: निकाल करना हो तो किस प्रकार करें? मन में भाव करें कि यह पूर्व जन्म का आया है?

दादाश्री: उतने से निकाल नहीं होगा। निकाल अर्थात् सामनेवाले के साथ फोन जोड़ना पडे़गा, उसकी आत्मा को खबर देनी पड़ेगी। उस आत्मा के सामने ऐसा कबूल (एक्सेप्ट) करना पड़ेगा कि हमारी भूल हुई है अर्थात् बड़ा प्रतिक्रमण करना होगा।

प्रश्नकर्ता: कोई हमारा अपमान करे, फिर भी हमें उसका प्रतिक्रमण करना है?

दादाश्री: अपमान करे तभी प्रतिक्रमण करना है, हमें मान दे तब नहीं करना है। प्रतिक्रमण करने से उस पर द्वेषभाव तो होगा ही नहीं, ऊपर से उस पर अच्छा असर पड़ेगा। हमारे प्रति द्वेषभाव नहीं होगा, वह तो समझो पहला स्टेप, पर बाद में उसे खबर भी पहुँचती है।

प्रश्नकर्ता: उसके आत्मा को पहुँचती है क्या?

दादाश्री: हाँ, ज़रूर पहुँचती है। फिर वह आत्मा उसके पुद्गल को भी धकेलती है कि ‘भाई फोन आया तेरा।’ अपना यह प्रतिक्रमण है, वो अतिक्रमण के ऊपर है, क्रमण के ऊपर नहीं।

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