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कितना दान करना चाहिए?

प्रश्नकर्ता : 'अतिरिक्त'(सरप्लस) से आप क्या कहना चाहते हैं?

दादाश्री : अतिरिक्त का मतलब, आप दो और फिर अगले दिन आपको उसकी चिंता न हो। आप तभी देना, जब आपको यकीन हो कि अगले छ महीनों तक आपको कोई आर्थिक मुसीबत नहीं आएगी, वर्ना मत देना। वास्तव में तो, अगर आप यहाँ पर दान देंगे तो आपको कोई मुसीबत नहीं आएगी। सबकुछ संभल जाएगा। यह तो भगवान का काम है। जो यह काम करते हैं, उनके लिए सबकुछ सही हो जाता हैं। लेकिन फिर भी मैं आपको चेतावनी देता हूँ। जो निरर्थक है, वह करने के लिए मैं आपसे क्यों कहूँगा? आपके अच्छे के लिए मैं आपको चेतावनी दे रहा हूँ। इस जन्म में आप यह जो आनंद ले रहे हैं, वह पिछले जन्म में आपने जो दिया है, उसका परिणाम है। इस जन्म में जो आप देंगे, उसका फल आपको अगले जन्म में मिलेगा। यह सब आपके ही अगले जन्म के पुण्य के लिए है। मेरा इससे कोई वास्ता नहीं हैं। मैं तो सिर्फ, आपके पैसे अच्छे उद्देश्य के लिए खर्च हों, उसमें मदद कर रहा हूँ। जो भी आपने पिछले जन्म में दिया, उसका फल आप इस जन्म में भोग रहे हो। आपके पास जो भी हैं वह आपकी बुद्धि की वजह से नहीं, बल्कि आपके पुण्य की वजह से है। आपने जैसा बोया होगा, वैसा ही फल आपको मिलेगा।

अतिरिक्त पैसों का निवेश दान में करो

लोग दुनिया के तौर-तरीकों को देखकर सांसारिक तरीकों को अपनाते हैं। तब ज्ञानी पूछते हैं, "आप ऐसे गड्ढ़े में क्यों गिर रहे हो जिसमें आपकी सारी मेहनत की कमाई बर्बाद हो जाएगी?" लोग दुःख के गड्ढ़े में से निकलकर पैसों के गड्ढ़े में गिरते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा जितना भी पैसा है, उसे किसी परोपकारी कार्य में दे दो, क्योंकि जो पैसा बेंक में पड़ा हो वह आपके कुछ काम नहीं आएगा। अगर आप अपने पैसे दान करोगे, तो आपको कोई विघ्न नहीं आएगा। यदि आप दान देंगे तो वह आपके ही खाते में जमा होगा (कर्म का खाता)।

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