मृत्यु और मानव-संबंध : समाधि मरण

जब किसी का प्रिय स्वजन मृत्युशैय्या पर हो, तब उसे क्या करना चाहिए? अपने स्वजन की मृत्यु के बाद हमें क्या करना चाहिए। कौन सी समझ रखकर हम शांत और संतुलित रह सकते हैं?

किसीकी मृत्यु के बाद होनेवाले क्रियाकर्म और दान-पुण्य करने के पीछे सामान्यत : लोगों की क्या मान्यता है? मृत्यु के बाद विभिन्न सामाजिक क्रियाओं का क्या महत्व है? क्या इन सभी धार्मिक क्रियाओं से मृतकों को फायदा होगा? क्या ये धार्मिक क्रियाएँ करनी चाहिए?

क्या मर्सी किलिंग (दया मृत्यु) सही है?आत्महत्या के कारण और उसके परिणाम क्या हैं?आत्महत्या के विचार क्यों आते हैं?

समाधिमृत्यु क्या है?समाधिमृत्यु मतलब मृत्यु के समय अपनी आत्मा के अलावा कुछ याद नहीं आना।

पूज्य दादाश्री ने ऐसे प्रश्नों के सही वैज्ञानिक उत्तर दिए है।

 

 

मृत्यु के रहस्य

हम हमारे कर्म के अनुसार लोगों से मिलते और बिछड़ते है|जब हम शोक करते है तब हमारे सपंदन मृत व्यक्ति के आत्मा तक पहुचकर उन्हें कष्ट देते है| इसलिए हमें उनके आत्मा की प्रगति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए|

Spiritual Quotes

  1. ऐसा है न, भगवान की दृष्टि से इस संसार में क्या चल रहा है? तब कहे, उनकी दृष्टि से तो कोई मरता ही नहीं। भगवान की जो दृष्टि है, वह दृष्टि यदि आपको प्राप्त हो, एक दिन के लिए दें वे आपको, तो यहाँ चाहे जितने लोग मर जाएँ, फिर भी आपको असर नहीं होगा, क्योंकि भगवान की दृष्टि में कोई मरता ही नहीं है।
  2. कभी न कभी सोल्युशन तो लाना पडे़गा न? जीवन-मृत्यु का सोल्युशन नहीं लाना पड़ेगा? वास्तव में खुद मरता भी नहीं है और वास्तव में जीता भी नहीं है। यह तो मान्यता में ही भूल है कि स्वयं को जीव मान बैठा है। खुद का स्वरूप शिव है। खुद शिव है, लेकिन यह खुद की समझ में नहीं आता है और खुद को जीवस्वरूप मान बैठा है!
  3. किसी भी वस्तु का जन्म होता है, उसकी मृत्यु अवश्य होती है। और आत्मा अजन्म-अमर है, उसकी मृत्यु ही नहीं होती।
  4. ये जन्म-मृत्यु आत्मा के नहीं हैं। आत्मा परमानेन्ट वस्तु है। ये जन्म-मृत्यु इगोइज़म, अहंकार के हैं। इगोइज़म जन्म पाता है और इगोइज़म मरता है।
  5. मृत्यु के बाद जन्म और जन्म के बाद मृत्यु है, बस। यह निरंतर चलता ही रहता हैं! अब यह जन्म और मृत्यु क्यों हुए हैं? तब कहे कॉज़ेज़ एन्ड इफेक्ट, इफेक्ट एन्ड कॉज़ेज़, कारण और कार्य, कार्य और कारण। उसमें यदि कारणों का नाश करने में आए, तो ये सारे 'इफेक्ट' बंद हो जाएँ, फिर नया जन्म नहीं लेना पड़ता है!
  6. करना, करवाना और अनुमोदन करना-ये तीन कर्मबंधन के कारण हैं।
  7. मेरे हिसाब से ज़िन्दगी, वह जेल है, जेल! वे चार प्रकार की जेलें हैं। पहली नज़ऱकैद है। देवलोग नज़ऱकैद में हैं। ये मनुष्य सादी कैद में हैं। जानवर कड़ी मज़दूरीवाली ़कैद में हैं और नर्क के जीव उमऱकैद में हैं।
  8. जो अहंकार है न, उसे आवागमन है। आत्मा तो मूल दशा में ही है। अहंकार फिर बंद हो जाता है, इसलिए उसके फेरे बंद हो जाते है!
  9. केवल मनुष्य जन्म में ही 'कॉज़ेज़' बंद हो सकें ऐसा है। अन्य सभी गतियों में तो केवल 'इफेक्ट' ही है। यहाँ 'कॉज़ेज़' एन्ड 'इफेक्ट' दोनों हैं।
  10. यह अभिनय है। दी वर्ल्ड इज़ दी ड्रामा इटसेल्फ, (संसार स्वयं एक नाटक हैं) आपको नाटक ही करना है केवल, अभिनय ही करना है, लेकिन अभिनय 'सिन्सियरली' करना है।

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