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मेरे ऊपरी अधिकारी मेरे दोष क्यों निकालते हैं?

प्रश्नकर्ता: दादा, व्यवहार में व्यू पॉइन्ट के टकराव में, बड़ा छोटे की भूल निकाले, छोटा अपने से छोटे की भूल निकाले, ऐसा क्यों?

दादाश्री: वह तो ऐसा है कि बड़ा छोटे को खा जाता है, बड़ा छोटे की भूल निकालता है, उसके बजाय आप कहो कि मेरी ही भूल है। भूल को स्वीकार कर लो, तब उसका हल निकलता है। 'हम' क्या करते हैं कि दूसरा यदि सहन न कर सके तो 'हम' अपने ऊपर ही ले लेते हैं, दूसरे की गलतियाँ नहीं निकालते। दूसरों को क्यों दोष दें? अपने पास सागर जैसा पेट है! देखो न, बम्बई की सभी गटरों का पानी सागर खुद में समा लेता है न? वैसी ही आप भी पी लो। इससे क्या होगा कि, इन बच्चों पर और सभी लोगों पर प्रभाव पडे़गा। वे भी सीखेंगे। बच्चे भी समझ जाते हैं कि इनका पेट सागर जैसा है! जितना आए, उतना जमा कर लो। व्यवहार में ऐसा नियम है कि अपमान करनेवाला अपनी शक्ति हमें देकर जाता है। इसलिए अपमान ले लो, हँसते हँसते!

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