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आत्मज्ञान क्या है ?

आत्मा-अनात्मा का वैज्ञानिक विभाजन !

जैसे इस अँगूठी में सोना और ताँबा दोनों मिले हुए हैं, उसे हम गाँव में ले जाकर किसी को कहें कि, 'भैया, अलग अलग कर दीजिए न!' तो क्या कोई भी कर देगा ? कौन कर पायेगा ?

प्रश्नकर्ता : सुनार ही कर पायेगा।

दादाश्री : जिसका यह काम है, जो इसमें एक्सपर्ट है, वह सोना और ताँबा दोनों अलग कर देगा। सौ का सौ टंच सोना अलग कर देगा, क्योंकि वह दोनों के गुणधर्म जानता है कि सोने के गुणधर्म ये हैं और ताँबे के गुणधर्म ऐसे हैं। उसी प्रकार ज्ञानी पुरुष आत्मा के गुणधर्म को जानते हैं और अनात्मा के गुणधर्म को भी जानते हैं।

जैसे अँगूठी में सोना और ताँबे का 'मिक्ष्चर' हो तो उसे अलग किया जा सकता है। सोना और ताँबा दोनों कम्पाउन्ड स्वरूप हो जाते तो उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। क्योंकि इससे गुणधर्म अलग ही प्रकार के हो जाते। इसी प्रकार जीव के अंदर चेतन और अचेतन का मिक्ष्चर है, वे कम्पाउन्ड स्वरूप नहीं हुए। इसलिए फिर से अपने स्वभाव को प्राप्त कर सकते हैं। कम्पाउन्ड हुआ होता तो पता ही नहीं चलता। चेतन के गुणधर्मों का भी पता नहीं चलता और अचेतन के गुणधर्मों का भी पता नहीं चलता और तीसरा ही गुणधर्म उत्पन्न हो जाता। पर ऐसा नहीं है। वह तो केवल मिक्ष्चर हुआ है। इसलिए ज्ञानी पुरुष इनको अलग करके दे दें तो आत्मा की पहचान हो जाये।

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