नौ कलमें : सभी धर्मों का सार

'इतना धर्म और धार्मिक क्रियाओं करने के बावजूद भी वह व्यवहार में क्यों नज़र नहीं आता?' क्या यह बात आपको  परेशान नहीं करती? इसके पीछे कारण क्या है?

पूज्य दादाश्री ने इन सभी प्रश्नों और उलझनों के पीछे का रहस्य बताया है। उनका कहना है कि हमारा वर्तन पिछले जन्म के कॉज़िज का परिणाम है। आज जो हो रहा है, वह इफेक्ट है। 'भाव' का अर्थ है, अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर हुए भाव जिनका किसीको पता नहीं चलता। ये भाव 'कारण' है। परिणाम को कोई बदल नहीं सकता। यदि कारण बदलेंगे तभी परिणाम बदलेगा।

पूज्य दादाश्री ने सभी धार्मिक ग्रंथों का निचोड़ हमें नौ कलमों के रूप में दिया है। ये नौ कलमें अपने भावों को मूल से बदलने की चाबियाँ है। शास्त्रों का गहन अध्ययन भी भावों में इस प्रकार के परिवर्तन नहीं ला सकता।

हज़ारों लोगों को नौ कलमों द्वारा बहुत फायदा हुआ है। इन नौ कलमों को पढ़कर नए आंतरिक भाव पूर्णरूप से बदल जाते हैं और जीवन में शांति का अनुभव होता है। इससे जीवन की सारी नकारात्मकता खत्म हो जाती है। यह सभी धर्मों का सार है।

इनसे मोक्ष का रास्ता और आध्यात्मिक विकास बहुत आसान हो जाएगा।

धर्म क्या है ?

धर्म हमारे गतिविधियों पर आधारित नहीं है| वह हमारे भीतर के भावों पर आधारित है| व्यवहार जो दूसरों को दुःख पहुँचाए वह अधर्म है|

Spiritual Quotes

  1. कारन बदलने पर परिणाम अपने आप बदल जाता है |
  2. अभिप्राय बदलने से कॉज़िज बदलते हैं।
  3. दोषित दिखाई देता है, वह आपके दोष के कारण दिखाई देता है। बाकी, जगत् दोषित है ही नहीं। लेकिन आपकी बुद्धि दोषित दिखाती है कि इसने गलत किया।
  4. जब तक किसी के लिए तिरस्कार होगा, तब तक वीतराग नहीं हो पाएँगे। वीतराग होना पडे़गा, तभी आप छूट सकेंगे।
  5. अब ‘यह नहीं करना है’ ऐसा कहा न, वहीं से आपका अभिप्राय अलग हो गया। फिर करता हो उसका हर्ज नहीं है।  लेकिन अभिप्राय जुदा हुआ कि छूटा! यह मोक्षमार्ग का रहस्य है, वह जगत् के लक्ष्य में होता नहीं न!
  6. इन्हें बोलने से आपके आज तक के जो दोष हुए हैं न, वे सारे ढीले हो जाएँगे। और फिर इसका परिणाम तो आएगा ही। सारे दोष जली हुई रस्सी के समान हो जाते हैं, फिर यों हाथ लगाते ही ढेर हो जाएँगे।
  7. हमारी इन नौ कलमों में उच्चतम भावनाएँ निहित हैं। सारा सारांश इनमें समाया हुआ है।
  8. यदि ये नौ कलमें पढे़ं और भावना करें तो दुनिया में किसी के साथ बैर नहीं रहे, सभी के साथ मैत्री हो जाये।
  9. ये नौ कलमें तो सभी शास्त्रों का सारांश है।
  10. तिरस्कार से उसका अहम् दुभेगा।

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