ब्रह्मचर्य का विज्ञान

ब्रह्मचर्य क्या है? ब्रह्मचर्य क्यों महत्वपूर्ण है? विषय विकार के आकर्षण से किस प्रकार मुक्त हुआ जा सकता है?

यह पुस्तक ज्ञानीपुरुष दादाश्री के ब्रह्मचर्य से संबंधित सत्संगों को संकलित करके बनाई गई है। इसमें ब्रह्मचर्य की स्थूल और सूक्ष्म समझ दी गई है और इसके फायदे पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से समझाए गए हैं।

ब्रह्मचर्य, जीवन का सार है। ब्रह्मचर्य साधने से आप संसारिक लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। इससे आप अपनी प्रतिज्ञाएँ और वचन निभा पाएँगें। ब्रह्मचर्य से हर दिशा में आसानी से प्रगति हो सकेगी।

यह संसार जो विषय के भ्रांत सुख में डूबा हुआ है, उसे इस विषय की सच्चाई और वास्तविकता को जागृत किया गया है।

इसमें समझाया गया है कि सच्चा आनंद क्या है और उसे कैसे प्राप्त करें, जो ब्रह्मचर्य को समझना चाहते हैं और उसका पालन करना चाहते हैं उनके लिए ज्ञानीपुरुष की यह अनोखी दृष्टि मोक्ष की संपूर्ण गारन्टी बन जाएगी।

Science of Celibacy

Pujya Niruma explains the spiritual science behind celibacy. She describes that, if you find happiness from your Soul, you will no longer crave happiness from sex.

Spiritual Quotes

  1. विषयों का जोखिम जाना नहीं इसलिए उसमें रुका ही नहीं है।
  2. विषय का पृथक्करण करें तो खाज खुजलाने के समान है।
  3. अब तप कब करना होता है? मन में विषय के विचार आते हो और खुद का दृढ़ निश्चय हो कि मुझे विषय भोगना ही नहीं है। इसे भगवान ने तप कहा।
  4. जिसने अब्रह्मचर्य जीत लिया उसने सारा संसार जीत लिया। ब्रह्मचर्य पालनेवाले पर तो शासन देवी-देवता बहुत प्रसन्न रहते हैं
  5. आपका संपूर्ण ब्रह्मचर्य पालन का निश्चय और हमारी आज्ञा, दोनों मिलकर अचूक कार्य सिद्धि होगी ही, यदि भीतर में निश्चय ज़रा-सा भी इधर-उधर नहीं हुआ तो।
  6. 'मैं शुद्धात्मा हूँ' यह निरंतर लक्ष्य में रहे वह महानतम ब्रह्मचर्य है।
  7. संसार जीतने के लिए एक ही चाबी बताता हूँ कि विषय यदि विषयरूप नहीं हो तो सारा संसार जीत जाएँगे |
  8. जहाँ विषय की बात भी है, वहाँ धर्म नहीं है। धर्म निर्विकार में होता है। चाहे जितना कम अंश में धर्म हो, मगर धर्म निर्विकारी होना चाहिए।
  9. एक बार के विषय में करोड़ों जीवों का घात होता है, एकबार में ही! यह नहीं समझने के कारण यहाँ मौज उड़ाते हैं। समझते ही नहीं! मजबूरन जीव मरें ऐसा होना चाहिए। लेकिन समझ नहीं हो, वहाँ क्या किया जाए ?
  10. यह स्त्री है' ऐसा देखते हैं। वह पुरुष के भीतर रोग हो तभी स्त्री दिखती है, वर्ना आत्मा ही दिखे और 'यह पुरुष है' ऐसा देखती है, वह उस स्त्री का रोग है। निरोगी हो तो मोक्ष होता है।

Related Books

×
Share on
Copy