क्या भगवान न्यायी हैं? अन्याय क्यों होता है?

ऐसा क्यों होता है कि कभी निर्दोष व्यक्ति को जेल की सजा होती है और दोषित व्यक्ति मुक्त घूमता है, इसमें न्याय कहाँ है? सिद्धांतों पर चलनेवाला व्यक्ति दुःख उठाता है और सिद्धांतों को तोड़नेवाले जीवन का मज़ा लूटते हैं। भगवान किसी को दुःखी क्यों होने देते हैं? दुनिया में चोर और जेब-कतरे क्यों हैं?

दुनिया में इतनी प्राकृतिक विपत्तियाँ क्यों आती हैं? भूकंप, तूफान और बाढ़ क्यों आते हैं? क्या यह भगवान की इच्छा है?

भगवान न्यायी है या अन्यायी? मेरे जीवन में हुए अन्याय के लिए कौन ज़िम्मेदार है?

इन सब बातों को हम कैसे समझें?

पूज्य दादाश्री ने अपने अदभुत ज्ञान से हमें यह बताया है कि वास्तव में दुनिया में अन्याय है ही नहीं।'जो हुआ वहीं न्याय'अपने जीवन में इस एक वाक्य को उतारेंगे तो मुश्किल समय में यह आपको शांति देगा और इससे आंतरिक समता रहेगी।

हमारे जीवन में होनेवाले न्याय और अन्याय के पीछे रहे रहस्यों को जानने के लिए पढ़ें....

हुआ सो न्याय

हम जो यह भुगत रहे हैं वह हमारे पूर्व जन्म की गलतियों की सजा हमें मिल रही है| देखिये यह विडियो और अधिक जाने की कैसे हमारी समस्यायों को हम वैज्ञानिक तरीके से हल कर सकते है|

Spiritual Quotes

  1. 'हुआ सो न्याय' समझे तो पूरा संसार पार हो जाये ऐसा है।
  2. अगर कुदरत को जरा भी अन्यायी मानोगे तो आपका संसार में उलझने का कारण ही है वह।
  3. कोर्ट में अन्याय हुआ होगा, लेकिन कुदरत कभी अन्यायी हुई ही नहीं है।
  4. कुदरत विनाश करती है, वह भी सही है और कुदरत जिसका पोषण करती है वह भी सही है। सब रेग्युलर करती है, ऑन द स्टेज। कुछ लोग तो अपने स्वार्थ को लेकर शिकायत करते हैं ।
  5. अगर आप कुदरत के न्याय (हुआ सो न्याय) को समझ जाएँगे तो वह आप को मोक्ष दिलवाएगा।
  6. बुद्धि हमें फँसाती है कि इसे न्याय कैसे कहें ?
  7. उसके कारणो में तो, हम खुद जो न्याय खोजने निकले, वह ही उसका कारण है। न्याय खोजना बंद कर दें तो बुद्धि जाती रहेगी।
  8. भगवान न्याय स्वरूप नहीं है और भगवान अन्याय स्वरूप भी नहीं है। किसी को दुःख नहीं हो, वही भगवान की भाषा है। न्याय-अन्याय तो लोकभाषा है।
  9. लोग निर्विकल्प होने के लिए 'न्याय' ढूँढने निकले हैं। विकल्पों का अंत हो वही रास्ता मोक्ष का! विकल्प खड़े नहीं हों ऐसा है न अपना मार्ग ?
  10. 'जैसा है वैसा' जानना, उसका नाम ज्ञान और 'जैसा है वैसा' नहीं जानना, उसका नाम अज्ञान ।

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