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क्या मुझे भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए?

लोगों को तीन साल की इकलौती बेटी हो तो, मन में ऐसा होता है कि यह बड़ी होगी तो इसकी शादी करनी होगी, उसमें खर्च होगा। ऐसी चिंता करने को मना किया है। क्योंकि जब उसका टाइमिंग मिलेगा, तब सारे ऐविडन्स (संयोग) इकट्ठे हो जाएँगे। इसलिए टाइमिंग आने तक आप उसमें हाथ मत डालना। आप अपने तरी़के से बेटी को खिलाओ-पीलाओ, पढ़ाओ, लिखाओ लेकिन आगे की सारी चिंता मत करो, आज के दिन की, वर्तमान की ही! भूतकाल तो बीत गया। जो आपका भूतकाल है, उसे क्यों उखाड़ते हो? नहीं उखाड़ते न! भूतकाल बीत गया, उसे तो कोई मूर्ख मनुष्य भी नहीं उखाड़ता। भविष्य व्यवस्थित के हाथों में है, फिर हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए। अभी चाय पीते हो तो आराम से चाय पी रहे, क्योंकि भविष्य व्यवस्थित के हाथों में है। हमें क्या झंझट? इसलिए वर्तमान में ही रहना। जब खाना खाओ, उस घड़ी खाने में पूर्ण चित्त रखकर खाना चाहिए। पकोडे़ किसके बने हैं, यह सब आराम से जानना। 'वर्तमान में रहना', इसका अर्थ क्या कि बहीखाता लिखो तो बिल्कुल एक्युरेट, उसी में ही चित्त रखना चाहिए। क्योंकि यदि चित्त भविष्यकाल में जाएगा है तो उससे आज का बहीखाता बिगड़ जाएगा है। क्योंकि भविष्य के विचार किच-किच करते हैं, जिससे आज का बहीखाता बिगड़ जाता है। भूल-चूक हो जाती है। लेकिन जो वर्तमान में रहता है, उसकी एक भी भूल नहीं होती, उसे चिंता नहीं होती।

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