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कर्ता कौन है?

कर्ता कौन है? ये संयोग कर्ता हैं। ये सारे संयोग, साइन्टिफिक सरकमस्टेन्शियल एविडेन्स इकट्ेठ होते हैं, तब कार्य हो ऐसा है। तो आपके हाथ में सत्ता नहीं है। आपको तो संयोगों को देखते रहना है कि संयोग कैसे हैं। संयोग इकट्ठे होते है तो कार्य हो ही जाता है। कोई मनुष्य मार्च महीने में बरसात की आशा रखे, वह गलत कहलाएगा है। और जून की पंद्रह तारीख आई कि संयोग इकट्ठे हुए। काल का संयोग इकट्ठा हुआ, परंतु बादलों का संयोग नहीं मिला हो, तो बिन बादल बरसात कैसे होगी? परंतु बादल जमा हुए, काल आ मिला, फिर बिजलियाँ कड़कीं, अन्य एविडन्स इकट्ठे हुए, तो बरसात होगी ही। अर्थात् संयोग मिलने चाहिए। मनुष्य संयोगाधीन है, परंतु खुद ऐसा मानता है कि, 'मैं कुछ करता हूँ'। परंतु उसका कर्ता होना भी संयोगाधीन है। एक संयोग बिखर गया, तो उससे वह कार्य नहीं हो सकेगा।

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