जीवन में टकराव टालने के लिए जानें

इस जीवन का लक्ष्य क्या है? हर कोई अपना जीवन जीते हैं, लेकिन सच्चा जीवन वही है जो क्लेशमुक्त हो। पति-पत्नी के बीच प्यार होने के बावजूद, दोनों के बीच आंतरिक टकराव और झगड़े होते हैं। जीवन में टकराव होने का मुख्य कारण गलतफहमी है। माता पिता और बच्चों के बीच के झगड़े भी समझदारी से ही सुलझाए जा सकते हैं। व्यापारिक टकराव, सास-बहू के झगड़े, मालिक-नौकर के झगड़े, भागीदारों और अन्य किसी भी संबंध में होनेवाले टकराव को हल करने की कुँजी कहाँ से मिलेगी?

Adjustments in Life

If you don't adjust in your life, adjust with people willingly then people will make you adjust forcingly. You have to take maximum adjustment with your spouse as you are with her for 24 hours.

Top Questions & Answers

  1. वास्तव में दुःख क्या है?
  2. बच्चों को कैसे सँभालें?
  3. शब्दों से बच्चों को दुःख होता है, तो बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करें?
  4. बच्चों को उनकी गलतियाँ सुधारने के लिए कैसे डाँटना-डपटना चाहिए?
  5. मेरा बीवी के साथ बहुत ज़ोरदार झगड़ा हो गया है- इसमें किसकी गलती है?
  6. सामनेवाला झगड़ा करने आए, तब मुझे क्या करना चाहिए?
  7. पुरुष और स्त्री के बीच होनेवाले झगड़ों का अंतिम समाधान क्या है?
  8. टकराव कैसे हल कर सकते हैं?
  9. टेढ़ी पत्नी/पति के साथ कैसा व्यवहार करें?
  10. टकराव को हल करने में ‘सही इरादे’ का क्या महत्व है?
  11. जीवन का ध्येय क्या होना चाहिए
  12. आदर्श व्यापार क्या है और इसकी सीमा क्या होनी चाहिए ?
  13. व्यापार के खतरों को ध्यान में रखें, लेकिन डर ना रखें।
  14. आज यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी से बिज़नेस करना चाहे तो बिज़नेस में नुकसान होता है, ऐसा क्यों ?
  15. मुझे अपने बिज़नेस को लेकर बहुत चिंता होती है। यह चिंता कैसे बंद हो ?
  16. कोई ग्राहक नहीं है, कोई बिज़नेस नहीं है, मैं क्या करूँ ?
  17. हमारे पास बहुत सारा पैसा है, लेकिन घर में शांति नहीं है ?
  18. उधार चुकाने की शुद्ध भावना रखें।
  19. सत्ता का दुरुपयोग कितना खतरनाक है ?
  20. अपने मातहत का रक्षण क्यों करना चाहिए ?

Spiritual Quotes

  1. मनुष्य का जन्म किसलिए है? खुद का यह बंधन, हमेशा का बंधन टूटे इस हेतु के लिए है, 'एब्सोल्यूट' होने के लिए है और यदि यह 'एब्सोल्यूट' होने का ज्ञान प्राप्त नहीं हो, तो तू दूसरों के लिए जीना।
  2. बाहरी टकराव एक जन्म तक रहता है। एक जीवन और भीतर के टकराव सौ-सौ जन्मों तक रहते हैं। वे हज़ारों जन्मों तक भी रह सकते हैं।
  3. हमें पूरी दुनिया को नहीं जीतना है, हमें सिर्फ अपने परिवार को जीतना है।
  4. यदि हमारा मन क्लेश रहित हो जाए, वही मोक्ष है, क्लेशित मन वही संसार है।
  5. क्लेश रहित जीवन जीना वही धर्म है। हिन्दुस्तान में यहाँ संसार में ही खुद का घर स्वर्ग बनेगा तो मोक्ष की बात करनी चाहिए, नहीं तो मोक्ष की बात करनी नहीं।
  6. माँ-बाप तो वे कहलाते हैं कि बच्चा खराब लाइन पर चला गया हो, फिर भी एक दिन माँ-बाप कहेंगे, 'भाई, ये हमें शोभा नहीं देता, यह तूने क्या किया?' तब दूसरे दिन से उसका बंद हो जाए।
  7. यह तो बेटे को इतना अधिक लाड़ करते हैं कि बेटा बिगड़ जाता है।
  8. कोई व्यक्ति खराब नहीं है, लेकिन आपको पता लगाना है कि वह कैसे उपयोगी हो सकता है। आपको यह नहीं कहना है, 'तुझे मिठाई बनानी नहीं आती। तुम नहीं जानती यह कैसे करना है और वह कैसे करना है। इसके बदले पता लगाओ कि उसे क्या आता है।
  9. समकिती की निशानी क्या? तब कहे, घर में सब लोग उल्टा कर डालें फिर भी खुद सीधा कर डाले।
  10. बिना पूछे सलाह देने बैठ जाए उसे भगवान ने अहंकार कहा है।

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