रिश्तों में शब्दों का प्रभाव : हानिकारक शब्दों को टालिए

सांसारिक जीवन में अध्यात्म कभी आया ही नहीं है। दोनों को अलग ही रखा गया है। यहाँ पर अक्रम विज्ञान ने अध्यात्म को सांसारिक जीवन के केन्द्र में रख दिया है।

पूज्य दादाश्री ने व्यवहारिक समाधान दिए हैं कि हम कैसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत का शुद्ध व्यवहार रखें, ताकि किसीको दुःख न हो। उनके द्वारा दिए गए समाधान सीधे दिल को छू लेते हैं और अंत में मुक्ति प्राप्त करवाते हैं।

क्या आप कभी शांति से बात नहीं करतें? आप अपने ऊपरी अधिकारियों और बॉस के साथ शांति से बात करते हैं। लेकिन अपने मातहत के साथ आप कठोर भाषा का प्रयोग करते हैं। आप दिनभर उनकी टीका करते हो और डाँटते हो जिससे आपकी पूरी बात बेकार जाती है, क्योंकि उसके पीछे अहंकार है।

बातचीत के माध्यम से पारस्परिक समस्याओं से कैसे निबटें, जानने के लिए आगे पढ़िए।

Clear mistakes by Pratikraman

Pratikraman is a method of spiritual repentance which clears karmas associated with hurting others. With this practice, conflicts are resolved and inner peace remains.

Spiritual Quotes

  1. शब्द मीठे चाहिए और शब्द मीठे नहीं हों तो बोलना नहीं।
  2. आपके बोलने में कोई ऐसा वाक्य नहीं है न, कि किसीको दुःखदायी हो जाए वैसा? तब तक बोलना खराब नहीं कहलाता।
  3. 'अपनी टीका करने का लोगों को अधिकार है। हमें किसीकी टीका करने का अधिकार नहीं है।'
  4. अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो इतना निश्चित करें कि वह पॉज़िटिव है।
  5. बोल (शब्द) तो लक्ष्मी है। उसे तो गिन-गिनकर देना चाहिए।
  6. सामनेवाले को फिट हो जाए, वह करेक्ट वाणी कहलाती है!
  7. यह तो माँ-बाप पागलों जैसा बोलते हैं फिर बच्चे भी पागलपन करते हैं।
  8. ये बच्चे दर्पण हैं। बच्चों पर से पता चलता है कि अपने में कितनी भूलें हैं!
  9. इसीलिए मैं लोगों से कहता हूँ कि सोलह साल की उम्र के बाद बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।
  10. हमेशा प्रेम से ही दुनिया सुधरती है। इसके सिवाय दूसरा कोई उपाय ही नहीं है उसके लिए।

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