टकराव टालो : घर्षण मुक्त जीवन के लिए

टकराव जीवन की एक हक़ीक़त है। इच्छा नहीं होने के बावजूद भी हम किसी के साथ टकराव में आ जाते हैं और दूसरों के दोष देखते हैं। ऐसा क्यों? इसका कारण जीवन के नियमों के बारे में हमारी खुद की सीमित समझ है। अक्रम विज्ञानी परम पूज्य दादाश्री ने मंत्र दिया है 'टकराव टालो' और बहुत ही सरल उदाहरण देकर जीवन के नियमों को समझाया है।

टकराव क्यों होते हैं?, किस-किस तरह के टकराव है? संबंधो में होनेवाले टकरावों से कैसे बचें? और एक क्लेश मुक्त जीवन किस प्रकार जीए? यह जानने के लिए आगे पढ़ें। इससे आपकी समझ और अधिक पॉज़िटिव हो जाएगी। इसका उद्देश्य यही है कि आपका जीवन सुख-शांति से भर जाए और आप मोक्षमार्ग पर दृढता से आगे बढ़ सके और आत्यंतिक मोक्ष की प्राप्ति कर सकें।

आत्मानुभूति को ज्ञानविधि भी कहा जाता है। इससे बहुत ही सरलता से संधर्ष मुक्त जीवन जी सकते हैं।

 

Adjustments in Life

If you don't adjust in your life, adjust with people willingly then people will make you adjust forcingly. You have to take maximum adjustment with your spouse as you are with her for 24 hours.

Spiritual Quotes

  1. प्रत्येक टकराव में हमेशा दोनों का नुकसान होता है। आप सामनेवाले को दुःख पहुँचायेंगे तो साथ साथ, वैसे ही, उसी क्षण आपको भी दुःख पहुँचे बगैर नहीं रहेगा। यह टकराव है।
  2. अपने खुद के नियमों और अर्थघटन के मुताबिक चलने के कारण टकराव होते हैं।
  3. टकराव से यह जगत खड़ा हुआ है। उसे भगवान ने, 'बैर से खड़ा हुआ है,' ऐसा कहा है।
  4. भले ही कोई हम से टकराये पर हम किसी से नहीं टकरायें, इस तरह रहें तो 'कॉमनसेन्स' उत्पन्न होगा।
  5. मतभेद मतलब तकरार और टकराना, यह हमारी "कमज़ोरी" है।
  6. इस दुनिया में जहाँ कहीं भी टकराव होता है, वह आपकी ही भूल है।
  7. टकराव, वह हमारी ही अज्ञानता है। भगवान की नज़र में सही और गलत ऐसा कुछ नहीं होता।
  8. टकराव की परिस्थिति में यदि अक्रम विज्ञान के सिद्धांतों के मुताबिक चला जाए तो आध्यात्मिक प्रगति होगी।
  9. जीवन की सभी परिस्थितियों में टकराव टालिए। टकराव - टकराव मुक्त जीवन ही जीते जी मोक्ष है।
  10. यदि सामनेवाला कोई भूल करे तो उसकी कोई गलती नहीं है; परंतु जब क्लेश होता है, तब उसके भयंकर परिणाम आते हैं। जहाँ क्लेश होता है, वहाँ भगवान नहीं रहते।

 

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